इंडियन प्रीमियर लीग शुरू कैसे हुई? आईपीएल का इतिहास।

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इंडियन प्रीमियर लीग एक प्रोफेशनल T20 क्रिकेट लीग है जो की भारत में खेली जाती है। यह लीग मार्च, अप्रैल से मई तक खेली जाती है। इस लीग में 8 टीम आपस में खेलती है जो भारत के 8 महानगरों का प्रतिनिधित्व करती है। लीग की स्थापना बोर्ड ऑफ़ कण्ट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (BCCI) ने 2008 में की थी। BCCI का इतना दबदबा है ICC में की, ICC की फ्यूचर टूर प्रोग्राम में आईपीएल को एक एक्सक्लूसिव विंडो प्रदान की जाती है।

आईपीएल दुनिया की सबसे बड़ी देखी जाने वाली लीग है। 2014 में इसे सभी खेलो में औसत अटेंडेंस के मापदंड पर छठा स्थान प्राप्त हुआ। 2010 में इंडियन प्रीमियर लीग पहली ऐसी स्पोर्टिंग इवेंट बनी जिसका लाइव प्रसारण यूट्यूब पर दिखाया गया। 2019 में आईपीएल की ब्रांड वैल्यू ₹ 475 बिलियन आंकी गयी। BCCI के अनुसार, 2014 के आईपीएल सीजन ने ₹ 1150 करोड़ इंडियन इकॉनमी में जोड़े।

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अभी तक आईपीएल के 12 सीजन हो चुके है। आईपीएल का करंट टाइटल होल्डर मुंबई इंडियंस की टीम है जिन्होंने 2019 का सीजन जीता था।

इंडियन प्रीमियर लीग का इतिहास

Indian Cricket League (ICL) नाम की लीग 2007 में बनी जिसको ज़ी एंटरटेनमेंट इंटरप्राइजेज ने फंडिंग प्रदान की। इंडियन क्रिकेट लीग 2007 और 2009 में भारत में खेली गयी। इन दो सीजन में इंडिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, वर्ल्ड XI और इंडिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश की 9 डोमेस्टिक टीम ने हिस्सा लिया। ये टूर्नामेंट T20 फॉर्मेट में था। आगे चल कर ICL की तैयारी 50 ओवर का टूर्नामेंट भी आयोजित करने की थी, पर ऐसा हो ना सका।

BCCI और ICC ने ICL को मान्यता नहीं दी क्योकि वह इस लीग से खुश नहीं थे। खिलाड़ियों को इस लीग में खेलने से रोकने के लिए, BCCI ने घरेलु क्रिकेट में प्राइज मनी दुगनी कर दी और साथ ही ICL में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को BCCI से आजीवन के लिए बैन कर दिया जिसकी वजह से काफी खिलाड़ियों में अपने फ्यूचर को ले कर डर बैठ गया। BCCI ने ICL को बागी लीग घोषित कर दिया।

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13 सितम्बर 2007 को दिल्ली में एक बड़ी सेरेमनी में BCCI ने अपनी फ्रेंचाइजी T20 लीग, इंडियन प्रीमियर लीग की घोषणा कर दी, जो अप्रैल 2008 से खेली जाएगी। इस लीग के पीछे का मास्टरमाइंड BCCI के उस वक़्त के वाईस प्रेजिडेंट ललित मोदी को कहा जाता है। ललित मोदी ने दिल्ली में मीडिया को टूर्नामेंट का फॉर्मेट, प्राइज मनी, फ्रेंचाइजी रेवेनुए सिस्टम, और टीम के स्क्वाड में खिलाड़ियों के शामिल होने के रूल विस्तार में बताये। और साथ ही ये भी उजागर किया की आईपीएल की गवर्निंग बॉडी में रिटायर्ड इंडियन क्रिकेटर और BCCI के अफसर होंगे। मोदी ने मीडिया को ये भी बताया की आईपीएल ICL को खतम करने के मकसद से अचानक नहीं शुरू की जा रही बल्कि आईपीएल की प्लानिंग पिछले दो साल से चल रही थी। लीग का फॉर्मेट इंग्लैंड की फुटबॉल लीग और अमेरिका की NBA लीग जैसा है

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21 मार्च 2010 को ज़ाहिर किया की आईपीएल में दो और फ्रेंचाइजी – पुणे वारियर्स इंडिया और कोच्ची टस्कर्स केरला को चौथे सीजन में शामिल होगी। पर शामिल होने के एक साल बाद ही 11 नवंबर 2011 को कोच्ची टस्कर्स को शर्ते पूरी ना होने पर BCCI ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। 14 सितम्बर 2012 को नए मालिक ना मिल पाने के कारण BCCI ने 2009 की चैंपियन डेक्कन चार्जर को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। 25 अक्टूबर 2012 को नीलामी में Sun TV Network ने हैदराबाद फ्रेंचाइजी को खरीद लिया जिसका नाम Sunrisers Hyderabad रखा गया

21 मई 2013 को पुणे वारियर्स इंडिया ने आर्थिक तंगी के कारण अपना नाम वापस ले लिया। 26 अक्टूबर 2013 को BCCI ने ऑफिशियली ये डिक्लेअर किया की पुणे वारियर्स जरुरी बैंक गारंटी ना दे पाने के कारण बाहर की जाती है।

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15 जून 2015 को चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स को दो सीजन के लिए मैच फिक्सिंग और बेटिंग स्कैंडल्स के कारण सस्पेंड किया गया। 8 दिसंबर 2015 को दोनों टीम की जगह लेने के लिए पुणे और राजकोट की टीम को आमंत्रित किया गया। यह दोनों टीम Rising Pune Supergiant  और  Gujarat Lions थी।

टूर्नामेंट फॉर्मेट

फिलहाल आठ टीम आपस में एक दूसरे से २ मैच खेलती है, एक घरेलु मैदान पर और एक विपक्षी टीम के मैदान पर। लीग स्टेज की टॉप चार टीम प्ले ऑफ में पहुँचती है। टॉप की दो टीम पहला क्वालीफाई मैच खेलती है, जीतने वाली टीम फाइनल मैच के लिए जगह पक्की करती है। जबकि दूसरी टीम को दूसरा चांस मिलता है सेकंड क्वालीफाई मैच में। इस बीच तीसरी और चौथी टीम एलिमिनेटर मैच खेलती है जिसमे जीतने वाली टीम सेकंड क्वालीफाई मैच में पहली क्वालीफाई मैच में हारी हुई टीम से खेलती है। सेकंड क्वालीफाई में जीती हुई टीम फाइनल में पहुँचती है। फाइनल में जीतने वाली टीम को आईपीएल की ट्रॉफी दी जाती है।

खिलाड़ी का अधिग्रहण, टीम का कम्पोजीशन और उनकी सैलरी।

एक टीम तीन तरह से बनायीं जा सकती है, नीलामी से, आपस में ट्रेडिंग से या फिर नीलामी से बचे हुए खिलाड़ियों को बाद में खरीद कर। नीलामी में सभी खिलाड़ी का एक बेस प्राइस सेट किया हुआ होता है। उसके बाद टीम खिलाड़ी को खरीदने के लिए बोली लगाती है। ज़्यादा बोली लगाने वाली टीम को खिलाड़ी दे दिया जाता है।

बिना बिक़े खिलाड़ी बाद में भी ख़रीदे जा सकते है। ट्रेडिंग के दौरान टीम आपस में खरीद फरोख्त करते है। पर ये तभी मुमकिन है जब खिलाड़ी इस से सहमत हो। फिर उसको दी हुई कीमत और दी जाने वाली कीमत के फ़र्क़ को, खिलाड़ी और टीम आपस में बांट लेते है। पर ये सब कुछ टूर्नामेंट शुरू होने से पहले करना पड़ता है, बाद में ऐसा नहीं किया जा सकता।

टीम कम्पोजीशन से जुड़े कुछ नियम:

टीम में कम से कम 18 खिलाड़ी और अधिकतम 25 खिलाड़ी हो सकते है
पूरी टीम की सैलरी मिलकर 85 करोड़ से अधिक नहीं हो सकती
अंडर 19 प्लेयर केवल तभी शामिल किये जा सकते है जब उनको फर्स्ट क्लास cricket या List A का अनुभव हो।
टीम में अधिकतम 8 विदेशी खिलाड़ी हो सकते है।
टीम के Playing XI में अधिकतम 8 विदेशी खिलाड़ी हो सकते है।
खिलाड़ी का कॉन्ट्रैक्ट न्यूनतम एक साल के लिए होगा और अधिकतम 2 साल के लिए।

2014 से पहले खिलाड़ी को डॉलर में पेमेंट दी जाती थी बाद में नीलामी भारतीय मुद्रा में दी जाने लगी। खिलाड़ियों को उनकी पसंद करेंसी में पेमेंट मौजूदा एक्सचेंज रेट पर दी जाती है। अमीर फ्रेंचाइजी पर ऊँगली उठती रहती है की वो खिलाड़ियों को लुभाने के लिए अंडर दी टेबल डील देते है जिसकी वजह से आईपीएल ने घरेलु खिलाड़ियों को नीलामी में शामिल किया जाने लगा।

एक सर्वे के अनुसार, आईपीएल की औसत सैलरी दुनिया में सभी लीग में दूसरे नंबर पर आती है। इसका कारण है खिलाड़ी सिर्फ दो महीनो के लिए ही साल भर में जुड़े हुए होते है। जबकि दूसरी लीग में कॉन्ट्रैक्ट पूरे साल का होता है।

प्राइज मनी

2019 में आईपीएल का सीजन विजेता को 20 करोड़ रुपए दिए गए जबकि दूसरे नंबर की टीम को 12.5 करोड़ रुपए दिए गए, तीसरे नंबर की टीम और चौथे नंबर की टीम को 8.75 करोड़ रुपए दिए गए। आईपीएल ने ये मैंडेट किया है टीम को प्राइज मनी का आधा हिस्सा खिलाड़ी में बांटना जरुरी है

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